How simple, yet complicated, personification could be

dr.nagesh pandey's avatarवेदना – समवेदना

तुम मेरे लिए सिर्फ़ एक शरीर नहीं हो

तुम नहीं हो मेरे लिए दिल बहलाने की चीज़

ज़रूरत भी नहीं हो,

तुम्हें शब्दों में नहीं बता सकता

तुम वहॉं हो जहॉं शब्द नहीं होते,

अब तुमनें मेरी नज़र में

अपने को शब्दों में ही देखा ,

शब्द , सिर्फ़ और सिर्फ़ बढ़ाते हैं

फ़ासले , कब जोड़ा है शब्दों नें?

तुम , मै , या कोई और

शब्द उलझाते हैं ,

भ्रम पैदा करते हैं शब्द ।

ऊबन सी होती है शब्दों की

दुनिया से,

चलो नि:शब्द हो जाएँ ,

फिर से शुरू करें वही सफ़र

जहॉं सिर्फ़ तुम थे

तुम , शब्द नहीं थे।

⁃ नागेश-

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